Friday, October 7, 2011

अकेला था तो मैं इस भीड़ में खोने से डरता था...


अकेला था तो मैं इस भीड़ में खोने से डरता था...
अभी तू साथ है मेरे..तुझे खोने से डरता हूँ...

कहाँ कल तक हमें बस फ़िक्र अपने आसुओं की थी...
कहाँ अब आजकल मैं बस तेरे रोने से डरता हूँ...

तुझे जब भूलना चाहूं तो तेरे ख्वाब आते है...
मुझे भी नींद आती है..मगर सोने से डरता हूँ...

तुझे पाने की चाहत में जिया हर एक लम्हा है...
मगर मजबूर हूँ कितना..तेरा होने से डरता हूँ...
                                                                                        -सोनित

Saturday, August 13, 2011

जश्न-ए-आजादी में "इन भारतीयों" को न भूलना...

जय हिंद ...
           

        यहाँ जिस्म ढकने की जद्दोजहद में...
        मरते हैं लाखों... कफ़न सीते सीते...

 
जरा गौर से उनके चेहरों को देखो...
हसते हैं कैसे जहर पीते पीते...



             वो अपने हक से मुखातिब नहीं हैं...
         नहीं बात ऐसी जरा भी नहीं है...
        उन्हें ऐसे जीने की आदत पड़ी है...
         यहाँ जिन्दगी सौ बरस जीते जीते...


 
                 
                                                                            कल देश में हर जगह जश्न होगा...
वादे तुम्हारे समां बांध देंगे...






 
मगर मुफलिसों की बड़ी भीड़ कल भी...
 खड़ी ही रहेगी तपन सहते सहते...
                                      
                              "जय हिंद"-सोनित 

Wednesday, August 10, 2011

वक़्त कैसा आ गया है, इस सफर में देखिये...


वक़्त कैसा आ गया है, इस सफर में देखिये...
जिंदगी हर मौत की शौकीन लगती है...
तूने बनाई थी बड़ी हमदर्द ये दुनिया...
संगदिल ये क्यूँ मुझे संगीन लगती है...

आंसुओ का हर तरफ़ सैलाब उमड़ा है...
दिल मगर बंजर कहाँ तक पीर भरती है...
मेरी पलकों पर लदा हर बोझ कड़वा है...
गैर पलकों की नमीं नमकीन लगती है...

दर्द से बेबस भले तिल-तिल तड़पता हो...
हर तमाशे पे यहाँ पर भीड़ लगती है...
और गलियों में मोहल्लों में वही चर्चा...
क्यूँ दर्द की हर दास्तां रंगीन लगाती है...

Sunday, August 7, 2011

मैं रोज नशा करता हूँ... गम रोज गलत होता है...


इक हाथ सम्हलती बोतल...
दूजे में ख़त होता है...
मैं रोज नशा करता हूँ...
गम रोज गलत होता है...

तरकश पे तीर चड़ाकर... 
बेचूक निशाना साधूँ...
उस वक्त गुजरना उनका... 
हर तीर गलत होता है...

मिटटी के खिलौने रचकर...
फिर प्यार पलाने वाली...
गलती तो खुदा करता है...
इन्सान गलत होता है...

तुम जश्न कहो या मातम...
हर रोज मनाता हूँ मैं...
मैं रोज नशा करता हूँ...
गम रोज गलत होता है...
                     - सोनित

Saturday, August 6, 2011

हमनजर हो जाइये या हमसफ़र हो जाइये...

हमनजर हो जाइये या हमसफ़र हो जाइये...

आज हमसे मिल के अब शाम-ओ-सहर हो जाइये...

तेरे बिन चारों तरफ कैसा अँधेरा छा गया...

इस अँधेरी रात में आ दोपहर हो जाइये...

तू गया तड़पा हूँ तबसे तेरी बाँहों के लिए...

जो भरे आघोष में ऐसी लहर हो जाइये...

या बसा दे ये जहाँ आकर के मेरे पास में...

छीन ले या जिन्दगी ऐसा कहर हो जाइये...
                                                             -सोनित 

Friday, August 5, 2011

kabhi kiwad se parde to hata kar dekho...

tere deedar me tallin najar aayenge...
kabhi kiwad se parde to hata kar dekho...

bina tar tere pas chale aayenge...
kabhi rahon pe ye palken to bicha kar dekho...

teri aahat se hi pahchan tujhe jayenge...
kabhi pallu se apni sakl chupa kar dekho...

bade jidhdhi hain...syahi se utar jayenge...
kabhi kagaj pe likho aur mita kar dekho...

main rahunga...tere saye to chale jayenge...
kabhi sham ko shamma to bujh kar dekho...
                                                                  -sonit

Tuesday, August 2, 2011

Nashe me yun hi peete peete phir na sham ho jaye...

Shahar me sham ho jaye...
Gali gumnam ho jaye...
Mujhe dar hai tere aashiq me..
Mera nam ho jaye...
Chupa kr dag dil k aaj duniya se chala jaunn...
Khi raste me chalte chalte na badnam ho jaye...
Khi tere khayalon me na phir yun doob jaun mai...
Mera hi aks mujhse ek din anjan ho jaye...
Jidhar dekhe najar meri udhar tera hi saya hai...
Nashe me yun hi peete peete phir na sham ho jaye...
                                                                                                             -sonit