Saturday, May 13, 2023

सत्यान्वेषण

मैं अपनी सारी 

मान्यताओं को 

विश्वासों को 

आदर्शों को 

खड़ा कर देना चाहता हूँ उन तर्क-वितर्कों के आगे

जो करें इनपे प्रहार पूरी ताक़त से पुरज़ोर 


नहीं भय कि टूटे मेरी मान्यताएँ 

सत्य समझा जिसे वो हो धराशायी

आदर्श जिन्हें माना वो हों निकम्मे साबित

और सारे विश्वास हो जाएँ मटियामेट 


अंततः 

आडंबरों के आवरण से 

मुक्त हो वह सत्य

जिसकी रोशनी भी अब कहीं 

आती नहीं मुझको नज़र